Category: कविताएं हिंदी में

  • इस दुनिया की सराय में हर रूह मुसाफ़िर है, तुम भी, और मैं भी। इस दुनिया से एक दिन चले जाना है, ये बात तुम्हें भी पता है और मुझे भी। कब आना है, कैसे जाना है, ये तुम्हारे या मेरे हाथ में नहीं है। लेकिन हम क्या छोड़कर जाएँगे,…

  • अस्तित्व से पहले

    जैसे तारे टूटने के पहले, ब्रह्मांड का ही एक हिस्सा होते हैं… जैसे बारिश होने के पहले पानी, बादलों का एक टुकड़ा होता है… जैसे रंग हमें दिखाई देने के पहले, सूरज की किरणों में होते हैं… जैसे प्रेम किए जाने से पहले भी हृदय के किसी कोने में अस्तित्व…

  • विरासत

    इस दुनिया की सराय में हर रूह मुसाफ़िर है, तुम भी, और मैं भी। इस दुनिया से एक दिन चले जाना है, ये बात तुम्हें भी पता है और मुझे भी। कब आना है, कैसे जाना है, ये तुम्हारे या मेरे हाथ में नहीं है। लेकिन हम क्या छोड़कर जाएँगे,…

  • अंतिम अनुरोध

    कभी-कभी मैं सोचती हूँ कि क्यों नहीं रह पायी कभी कोई भी सभ्यता इस धरती पर चिरकाल तक … क्यों हर सभ्यता अपनी चरम सीमा पर आने के बाद मिट गयी, और रह गये केवल उनके अवशेष। इस धरती ने बार-बार हमें अपनी गोद में जगह दी, नदियाँ दीं, पहाड़…

  • विदा !

    किसने कहा कि जो जाता है, वह लौटकर नहीं आता, इस कालचक्र का हिसाब पूरा करने हम बार-बार लौटते हैं। चाहे साल का आख़िरी दिन हो, या जीवन का आख़िरी क्षण, कोशिश करो कि जब भी हम विदा ले रहे हों किसी से, उस समय केवल प्रेम शेष रहे। क्योंकि…

error: Content is protected !!