इस दुनिया की सराय में हर रूह मुसाफ़िर है,
तुम भी, और मैं भी।
इस दुनिया से एक दिन चले जाना है,
ये बात तुम्हें भी पता है और मुझे भी।
कब आना है, कैसे जाना है,
ये तुम्हारे या मेरे हाथ में नहीं है।
लेकिन हम क्या छोड़कर जाएँगे,
ये चुनाव केवल हमारा होता है।
कोशिश करो कि शिकायतों की धूल की
जगह इस हवा में कुछ प्रेम छोड़कर जाओ,
चिड़िया के गाने के लिए,
बारिश से की गई अपनी मोहब्बत का ज़िक्र छोड़कर जाओ।
वो जो धूप क़ैद की थी तुमने कभी
अपनी हथेलियों में,
उन्हें किसी के आँगन में उतरने के लिए छोड़कर जाओ।
छोड़ दो उन अधूरी इच्छाओं को
कि वे बह जाएँ समय की नदी में,
अपनी कहानी में अपनी उदासियों की जगह
फूलों के रंगों का ज़िक्र छोड़कर जाओ।
तुम्हारे बाद जो ठहर जाए,
वह केवल एक प्रार्थना हो।
जो हर दिल को याद दिलाए
कि प्रेम कभी कहीं नहीं जाता।
वो जो तुम्हारी ज़िंदगी का
एक ख़ूबसूरत हिस्सा अधूरा रह गया था,
किसी और की ज़िंदगी के पन्नों में
पूरा हो जाएगा।
और इस तरह जो तुम छोड़कर जाओगे,
वह किसी और की शुरुआत बन जाएगा।
Written by Shilpa Shukla.
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