किसने कहा कि जो जाता है, वह लौटकर नहीं आता,
इस कालचक्र का हिसाब पूरा करने हम बार-बार लौटते हैं।
चाहे साल का आख़िरी दिन हो, या जीवन का आख़िरी क्षण,
कोशिश करो कि जब भी हम विदा ले रहे हों किसी से,
उस समय केवल प्रेम शेष रहे।
क्योंकि विदा के समय जो लेकर जाओगे,
वही लेकर दोबारा लौटोगे।
अगर किसी से प्रेम न कर पाओ,
तो उसे क्षमा कर देना।
प्रेम तुम्हें जन्म देता है,
और क्षमा .. मुक्ति।
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !
Written by Shilpa shukla.
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